आज का दौर की मिक्सी हमारु गों कु सिलौटु

Different Type Of Silbatta
Different Type Of Silbatta

आज कु पुरु पोस्ट होलु सिलौटा पर। अब हम दगडी त काफी लोगों तें पता भी निहोलु कि सिलौटा कि होंदु। चला मैं आपतें बतौन्दु हमारा दौर कु सिलौटु आज का दौर की मिक्सी, चक्की और इमामदस्ता सब एक ही प्रजाति का छन। जतका महत्व घर मा मिक्सी कु छन वतकी महत्व आयुर्वेद मा सिलौटा कु।हिंदी मा यु जु छा सिल बट्टा नौं सि जाणे जांदू।

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मैं बड़ी खुसी होंदी कि लोग यथैंइ तथैंइ बसिगि पर, अपड़ा गौं बीटी सिलौटु भी साथ लिकें गेई, जु लोग नि लेक गेई वों तें मै आज सिलौटा कु महत्व जरूर बतौलु।अब आप सोचण होला लग्यां कि ये कु प्रयोग उत्तराखंड मा ही होंदु पर ना, सिलौटा कु प्रयोग भारत मा राजस्थान, महाराष्ट्र एवं दक्षिण भारत और विश्व मा कौलाम्बिया, दक्षिण अमेरिका खासकर पेरू और बोलीविया की ओर आज भी जारी छन।

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सिलौटु चाहे कखि भी हो ये का द्वी भाग होंदा पहलु १-प्लेन पत्थर (सिल – सिलौटु ) २- बट्टा(सिलालौड – बेलण की छार लंन्बु). सिलौटा कु डलु हमेशा एक किनारा पर खड़ु करीक रखी रन्दु और वेका पैथर सिलालौड।जब भी लौंण चटनी पिसण कु मन करदु सिलौटा लटकाई द्य्यावा और पिसण स्टार्ट।हमारा यख सिलौटा कु महत्व और भी बढ़ी जांदू जब वैवाहिक कार्य की पहली हल्दी और एक दिन पहले पकौड़ा कैं दाल पिसण कु कार्य भी ये से शुरुवात होंदु।दाल पिसण सी पहलि टिका लगैक सिलौटा कु आमंत्रण स्वीकार करे जांदू। जु भी हो बल आमंत्रण भी के न हो गौं का ब्यो बारात की रसाण मा ये कु बहुत महत्व छ। वना त बहुत फायदा पर मैं कुछ आयुर्वेदिक और साइंटिफिक फायदा बतौलु।

Byo Barat Wedding
Byo Barat Wedding

आप सिलौटा सि खटाई मजीक अगर कालु  लूँण पिसदा त मिक्स कालु लूँणव स्वस्थ्य का खातिर बेहतर होंदु और पिसदि दूँ आपका कमर और हाथ की फ्री मा कसरत भी ह्वे जांदी। जब भी आप हल्का हल्का कुछ भी चीज पिसदा जनु मिर्च मसाला , त वैका भीतराकु तेल भी तत्कि धीरी धीरी रिसदु जुकी आपतें खाणा मा और स्वाद देन्दु, साथ मा पाचन का हिसाब सी भी जल्दी पाचनशील।सिलौटा हमेशा एक विशेष डला सी बणाये जांदू जैमा कुछ मात्रा का खनिज लवण आटोमेटिक आपतें समय समय पैर आपतें लाभ पहूंचांदा।अब आज का दौर की महत्वपूर्ण बात, भै अगर बिजली कु बिल बचौंण त, सिलौटा कु प्रयोग सर्वोपरि, एक पंथ और कई काज, जु बचाउंदा हमारा रीती रिवाज।    

Read in English:  Mixi of the mountains silbatta

“नमक और चटनी बनाऊँण कैं अगर आप अभी भी सिलौटा लेकें नि आयी त एक बार खरीद करीक ल्यावा और वैकि रशाण जरूर चाखीक देखा।अभी भी गौं मा लोग सिलौटु बनाऊँण लग्यां , और गौं सि नी त शहर मा भी मिली जांदू। रसाण जरूर चखा और औरों ते भी चखावा।अब जब आपतें पता चलीगी त अपड़ा साथ साथ औरों तें भी येकु महत्व जरूर बतावा।”
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