घेंन्जा खावा स्वस्थ रावा और सर्दी भगावा

Glimse Of Ghenja
Glimse Of Ghenja

आज की पोस्ट मैं लिखण लग्यूं घेंन्जा त्यौहार का बारा मा।बहुत सारा पाठक इना होला जौं न यु नौं पहली बार सुनी होलु। चला क्वी बात नी मै प्रयास कोलू परिचय देणा कु।घेंन्जा हमारा यख सर्दियों मा मणाये जाण वाला त्यौहारों मा दूसरा नंबर कु त्यौहार छ(खिचड़ी संग्रांद और बसन्त पंचमी शायद नंबर १)। हर साल गढ़वाल पंचांग का हिसाब सी २७ गते पौष कु ये त्योहार तें मणाऊँदा जु की खिचड़ी संग्रांद सी लगभग २-३ दिन पहली होन्दु।जख बच्चों मा तॅ भारी उत्साह रंदु कि कब घेंन्जा आला और कब माँजी दही की कटोरी और मीठा घेंन्जा खलालि, वखि बड़ा भी खुश लैंदा मा घेंन्जा।ये त्यौहार कु नाउँ ही घेंन्जा व्यंजन का नाउँ बिटि पड़ी।अगर आप ये शब्द पहली बार सुंण लग्यां या कभी नई खायी त हल्का शब्द मा ये कि रेसिपी कु व्याख्यान अगला पहरा मा।

सर्वप्रथम आप गेहूं, चावल, मुंगरी और झंगरियाल एकठु करा और घट या चकी बीटी पिसाई करीक ल्यावा। झंगरियाल जु छा स्वास्थ्य का खातिर बहुत ही बढ़िया होंदु और पाचन भी एकदम मस्त और तुरन्त।एक झटका माँ कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन सब मिनरल्स एक साथ मिली जांदा।वैका बाद आटा नार्मल ढंग सी रोटी बनाऊँण वाला आटा की तरह गोंदण।अगर मीठा घेंन्जा खांण त ग़ुड पानी सी आटा गोंदी सकदा नितर सादा पांणी ठीक रंदु।बाद मा रोटी कि छार बेला (जब चकला बेलन नई थै त लोग हाथन थप थप करीक गोंददा थैइ) और बड़ा निम्बू का पातका सी द्वी तरफ लगैक बर्तन फर डाला। बर्तन का निश पराल या सुखीं घास रखी सकदा ताकि घेंन्जा थरा पर फुके न राउ।अगर आप भर्यां घेंन्जा बाणोंण चांदा गाथ पिसिक भी भरी सकदा।

थोड़ा इन्तजार करा और भाप सी हल्की आंच पर पकणं देंदी रावा।५ मिनट मा सब तैयार।थोडी देर बाद भैर निकालिक थोड़ा सुखण देणा का बाद आप दही का साथ ये तें खई सकदा।यु त्यौहार सर्दियों कु छन और मोटू अनाज कु आटु होना का कारण पाचन भी सर्दियों मा अछु ह्वै जांदु। गर्मियों मा पाचन की थोड़ा मुश्किल छः।सबसी बड़ी बात मैं तें पर्सनली घेंन्जा बहुत पसंद न मीठा कम पर भार्यां हर टैम।

बड़ा बुजुर्ग बोल्दा की सर्दियों मा सब्जी कम होंदी, काम धाणी भी गर्मी की अपेक्षा काम रंदु, त घट मा आटु पिसनु कु टाइम मिली जांदू और मोटा अनाज सर्दी का बाद नयी आन्दु।येका सब कारणों सी स्वास्थ्यवर्धक घेंन्जा न जनम लीनी, फिर भी मैं रिसर्च कनु कि और भी क्या कारण रै ह्वालु ये त्यौहार मनाऊंन कु।

मैन काफी पता करि यख तख फ़ोन करीक पर पता नि चली की ये त्यौहार किलैं मनौनंदा अगर आपतें पता छन, ते मितें भी जरूर बतावा।ये त्यौहार सी संबन्धित आप मुँग क्वी कहानी हो तो शेयर करणा की महती कृपा की अपेक्षा रखुदू।क्वी विशेष जानकारी हो घेंन्जा का बारा मा मेल मैसेज कर्या जरूर तब तक तें आज्ञा चांदु आप सभी तें देर सि हि सैई पर घेंन्जा की बधाई।

लास्ट टाइम हामन पूछी की हम घेंजा के मनौन्दा , हमें जबाब मिलिगी और अब पढ़ा येका पैथर की कहानी।  जानकारी देणं वाला कु नौं गोपनीय छ अगर वी बोलला त हम नौं सार्वजानिक करि दयोला।

पुराणा जमाना मा एक महर्षि थै जौंका तीन पुत्र ह्वे। जख पहलु नंबर वालु बेटा बडू ह्वेक बहुत ज्ञानी ध्यानी पाठ पूजा करण वालु बणी। वखि दूसरा नंबर वालु बेटा एक पराक्रमी योद्धा और तीसरा नंबर वालु बेटा वाद्ययंत्र कु ज्ञाता होणा का कारण, वाद्ययंत्र बजोण वालु बणी।दूसुरु बेटा जब भी कुछ राज्य या बड़ी लड़ै जितिक औन्दु त पहलु बेटा और ऋषि बड़ा धूमधाम सि यज्ञ कु आयोजन करदा, लोगों मा उपहार भोजन बाँटदा ये सी द्वी की धन व वैभव की बृद्धि ह्वै। हर सामाजिक पारंम्परिक कार्यक्रम की जान हमेशा तिसुरू बेटा ही होंदु थै पर जब भी ज्ञान ध्यानी लोगों दगडी बात करणा कु अवसर होन्दु ऋषि महाराज अपड़ा प्रथम द्वी पुत्रों तें अगाड़ी करि देंदा थैइ।

अब धीरी धीरी तीसरा पुत्र तें यिं असमानता कु अहसास ह्वे, त वु ऋषि सी बहुत नाराज ह्वे, और कै भी पारंम्परिक कार्यों मा शामिल होणु भी बन्द कर्याली। तीसरा बेटा की अनुपस्थिति मा सारा बार त्यौहार की रौनक और हर्ष उल्लास ही ख़तम ह्वे गैनी।

ऋषि न जब यु देखि त अपड़ा तीनों बेटों तें बुलायी  और तीसरा बेटा की नाराजगी कु कारण पुछि। बेटा न बोली की मैं एक कलाकार छ मि तें धन वैभव सी क्वी मायामोह नी पर मै भी एक समय मौका चांदु जब आप मैं और द्वी भाई मेरी कला तें समर्पित ख़ुशी मनाई सकू । यु सुणिक ऋषि महाराज तें अपड़ी गलती कु अहसास ह्वे और वोन तीसरा बेटा तें वरदान देनी की पूस का महीना जब क्वी त्यौहार नई होन्दा हम तुम्हारी कला तें समर्पित, ठीक बड़ा त्यौहार मकर संग्रांद सि द्वी दिन पहली घेंन्जा नाउँ सी नयु त्यौहार मनौला। आपकी जानकारी तें मैं बतोण चांदू पूस का महीना क्वी शुभकाम नई होंदा फिर भी घेंन्जा एक विशेष त्यौहार का रूप मा मनाये जांदू कला का प्रति समर्पण ऋषि महाराज कु।

नोट :  यी तथ्य सब बुजुर्गों द्वारा मौखिक काल्पनिक घटनाओं आधारित छन और पाठकों का मनोरंजन का खातिर ये तें कहानी कु रूप दिये गये . ये कु कै वास्तविकता सी क्वी संबन्द नि छन।

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